अपनी आन, बान और शान के लिए मर मिटने वाले धीर, वीर, गंभीर अगरा राम जी अपने गांव में आए हुए डाकुओं से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए और आज भी वे अपने क्षेत्र के निवासियों की रक्षा करते हैं, ऐसी जन मान्यता है।
अगरा राम जी का जन्म चूरू जिला स्थित ग्राम पूलासर में हुआ था। पूलासर पारीक ब्राह्मणों का ही गांव है। कहते हैं काहल (कायल) पाण्डियों (पारीकों की एक खांप) का मूल ग्राम कोहली था जो अयोध्या के आस-पास था। मूलत: पाण्डिया कायल गौत्र के पारीक अयोध्या से काशीपुरी आये तथा काशी से कोहली ग्राम गए। कोहली ग्राम से कोटकूलर ग्राम एवं वहां से पल्लू ग्राम गए।
पल्लू ग्राम से उड़सर (तहसील सरदारशहर) एवं उड़सर से भोजाराम जी पाण्डिया के दो बेटे गंगाराम जी व रहड़ा राम जी अपने शिष्य पुलाराम जाट(सारण) जहां रहता था, आये। गुरु श्रद्धा स्वरूप पुलाराम ने अपना बड़ा खेत उन दोनों भाईयों को दिया। पुलाराम के नाम को चिरस्थाई रखने के उद्देश्य से इन दोनों भाईयों ने मिती वैशाख सुदी 3 संवत 1444 में पूलासर ग्राम बसाया। गंगाराम जी व रहड़ा राम जी के चार लड़के थे जिनके नाम उगाराम, खेमाराम, नाभाराम व भादाराम थे। इन चारों भाईयों के नाम से पुलासर में चार मोहल्ले उगाणिया, खेमाणिया, नाभाणिया, भादाणिया हैं। उगाराम जी के वंशज अगरा राम जी थे।