परम वैष्णव पर्वव जी के तीन पुत्रों गोपाल जी, परसराम जी, व खेमू जी क्रमश: बक्षाजी, राघवदासजी एवं किशोरजी हुए। पर्वत जी की धार्मिक प्रवृत्ति का संस्कार कहें य फिर अपने पिता श्री के संस्कारों का प्रताप कहें, पर्वत जी के तीनों पौत्रों ने धार्मिक एवं सार्वजनिक क्षेत्र में अविस्मरणीय कार्य किये जो आज भी उनकी कीर्ति को अक्षुण्ण बनाये हुए हैं। मंदिरों क निर्माण, कूप, कुण्ड, विश्रामगृह एवं अन्य जनोपयोगी कार्यो के लिए आज भी उन्हें याद किया जाता हैं। मातमी, परिवार के सबसे बड़े लड़के के नाम होती है, किन्तु पर्वत जी का प्रताप कहें य उनकी दूरदर्शिता जो उन्होंने अपने राजा आमेरपति पृथ्वीराज जी (1503-1527 ई.) को निवेदन की, सिरसी की जागीर, जो पर्वत जी को मिली थी, उनकी मृत्यु के बाद, उस जागीर की मातमी पर्वतजी के तीनों पुत्रों यथा गोपाल जी, परसरामजी एवं खेमू जी के नाम हुई। पर्वत जी की एक पुत्री भी हुई थी जो बाद में सती हो गई। सिरसी के पुरोहित आज भी इस सती माता को मानते हैं।