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बलभद्र जी पुरोहित
सेढ़ा जी की छठी पीढ़ी में बलभद्र जी हुए हैं। आपके पितामह भूधर जी एवं पिता कानड़ जी थे। आप उत्‍कृष्‍ट श्रेणी के वास्‍तुविज्ञ थे जिसका प्रमाण यह है कि आपकी देखरेख में इतिहास प्रसिद्ध रोहतासगढ़ (बिहार) के किले का जीर्णोद्धार सन् 1597 में कराया गया। रोहतासगढ़ के किले के जीर्णोद्धार के सम्‍बंध में शिलालेख एवं अन्‍य तथ्‍यों का उल्‍लेख श्रीधर जी के जीवनवृत्त में दिया जा चुका है। आमेर स्थित आपकी हवेली, वास्‍तुकला की उत्‍कृष्‍ट नमूना थी, जो आमेर के प्रसिद्घ पना मियां के कुण्‍ड के पास अवस्थित थी। आपके वंशज गोपी बल्‍लभ जी राज पुरोहित ने बताया है कि बलभद्र जी को किसी कारणवश कैद कर लिया गया और वे दिल्‍ली की जेल में डाल दिए गये। उनके जेल प्रवास के समय उनके एक लड़के की जिसकी उम्र बहुत ही छोटी थी, उनके निवास स्‍थान आमेर में मृत्‍यू हो गई। आमेर में दो मुसलमान पीर हैं एक वाज़ीद खां और दूसरे गैबी। वाज़ीद खां पीर की उस रात को सवारी निकली थी और उनके साथ उनका कोई मुरीद था। पीर जी की सवारी जब जा रही थी तो उन्‍होंने एक स्‍त्री का विलाप सुना। पीरजी के यह कहने पर कि यह स्‍त्री क्‍यों रो रही है मुरीद द्वारा जानकारी कर पीरजी को यह बताया गया कि एक छोटा बालक मर गया है, स्‍त्री का शौहर दिल्‍ली जेल में है। पुत्र की अकाल मृत्‍यू से एवं अपने शौहर के यहां नहीं होने से वह रो रही है। यह किवदन्‍ती है कि पीरजी ने अपनी दिव्‍य-शक्ति से जान लिया कि लड़के की मौत खुदा का फरमान है मगर इस नेक औरत का शौहर बेबात कैद हुआ है। अत: पीरजी ने स्‍त्री को कहलाया वह रोना बंद करे, शौहर दो रोज में आ जाएगा, बच्‍चा नहीं आवेगा यह कहकर पीरजी ने अपनी मजार दरगाह अपने मुरीद को सम्‍हलाई और कहा मैं दिल्‍ली जा रहा हूं।
प्रात:काल दिल्‍ली की मस्जिद की पैड़‍ियों पर एक फकीर बैठा था। मस्जिद के रखवालों ने देखा कि मस्जिद का नंगारा औंधा पड़ा है। नंगारे को सीधा करने के अनेकानेक प्रयास किए गये किंतु सफलता नहीं मिली। एक नये फकीर को मस्जिद की पै‍ड़‍ियों पर बैठा देखकर उन्‍होंने उनका अता-पता पूछा तो उन्‍होंने इतना ही कहा कि मेरा आदमी जेल में है उसे छोड़ दो, नंगारा सीधा हो जावेगा। यदि ऐसा नहीं किया तो दिल्‍ली हिलाकर उल्‍टी कर दूंगा। मस्जिद वालों ने बादशाह को सारी घटना बताई और निवेदन किया कि फकीर के आदमी को जेल से रिहा कर दिया जावे। बादशाह ने उनकी प्रार्थना अस्‍वीकार कर दी और कहा ऐसे फकीर बहुत आते हैं उसे उठाकर फेंक दो। बादशाह के हुक्‍म की तामील में जब फकीर को हटाने के लिए कारिन्‍दे आगे बढ़े तो जल जला (भूकंप) आ गया जिसे बादशाह ने भी महसूस किया। इस घटना की जानकारी बादशाह को दी गई, तो बादशाह ने कहा फकीर जिसे बताता है उसे छोड़ दिया जावे। कैदियों को इस तथ्‍य की जानकारी हो गई कि किसी फकीर के कहने पर एक कैदी छोड़ा जाने वाला है जिसका नाम फकीर ने बलभद्र बताया है जेल में यह आवाज लगने पर कि बलभद्र कौन है, सभी जेलियों ने अपने को बलभद्र बताया और हर जेली यह कहने लगा कि मैं बलभद्र हूं- मैं बलभद्र हूं। बादशाह को इस तथ्‍य की जानकारी कराई गई कि असली बलभद्र कौन है? मलून नहीं होता क्‍योंकि हर कैदी अपने को बलभद्र कहता है।
 
 

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