"उक्त उपदेश श्रवण करके गोपाल भक्त दादूजी के शिष्य बन गये और बड़े गोपालदास के नाम से दादूजी के 52 शिष्यों में प्रसिद्ध हुए। गोपाल भक्त ने कुछ दिन घर पर रहकर भी भजन किया था किंतु फिर वे विरक्त होकर घर से निकल गये थे और दादूजी महाराजा नरायणा में आकर विराजे थे तब से दादूजी के पास ही रहते थे। दादूजी महाराज से ब्रह्मलीन होने पर जब दादू वाणी की प्रतिष्ठा हुई थी तब बड़े गोपालदास जी को ही पुजारी नियुक्त किया गया था। श्रीदादू वाणी मंदिर नरायणा के प्रथम पुजारी बड़े गोपालदास जी ही हुए थे। बड़े गोपालदास जी वाणी मंदिर में प्रतिदिन तप, दीप सुधारना, आरती करना आदि सभी पुजारी कार्य करते थे। सभी गुरु भाई आपको बड़े गोपालदास जी के नाम से पुकारा करते थे। राघवदास जी ने भक्तमाल में एक मनहर छन्द द्वारा बड़े गोपालदास जी का परिचय दिया है"-
राघवदास जी कृत भक्तमाल में आपके संबंध में लिखा गया है कि आप दादूजी के पास रात दिन जिज्ञासू बनकर रहते थे तथा निरंतर प्रभु चिंतन करते रहते थे। |