Pareek Gaurav
 
 

 
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देवी ने कहा कि यह इच्‍छा भी पूरी होगी। इस पर परसरामजी ने पूछा कि आप कौन हो और मुझ पर इतनी कृपा कैसे की तो देवी ने कहा कि 'जिसकी यात्रा करने और जिसको तू अपनी काया बलि चढ़ाने जाता है वही मैं हूं। परसरामजी ने कहा कि यह मैं कैसे जानूं? इस पर माताजी ने सिंहवाहिनी अष्‍टभुजा होकर झांकी दी और कहा कि अब तो विश्‍वास हो गया? दर्शन करते ही और......इतना सुनते ही परसरामजी ने गदगद होकर देवी की स्‍तुति करते हुए साष्‍टांग दंडवत की और कहा कि आज मैं धन्‍य हूं और मेरा जीवन कृतार्थ हुआ। इस पर देवी ने आज्ञा की कि 'तुझे साक्षात दर्शन मिल चुके अब घर लौट जा तेरी कामना पूर्ण हो जाएगी।' परसरामजी ने शीघ्र ही लौटकर यह वृत्तांत अपनी स्‍त्री से कहा और नित्‍य कर्म से छुट्टी पाकर अपने घर लौटे। इस वरदान के प्रताप से उनके चार पुत्र और एक कन्‍या, पांच संतान हुई। यही कन्‍या कर्मेती बाई थी। कर्मेती की सगाई सांगानेर के वर्णा खांप के जोशियों के यहां कर्मेती की इच्‍छा के विरुद्ध हुई और विवाह भी उन के अनचाहे ही हुआ। बाल्‍यावस्‍था से ही वे कृष्‍ण की वात्‍सल्‍य भाव से उपासक थी। माता-पिता की सत्‍संगति का उन पर इतना प्रभाव पड़ा कि अपने छोटे से ठाकुर जी के अहर्निश लड़ती थी और बिहारी जी उनका नाम रख छोड़ा था। वैराग्‍य के चिन्‍ह उनके तन और मन पर अभी से दिखाई देने लगे थे, कि अभी 12 वर्ष की होने पाई थी। इस विवाह के हो जाने से मन उदास रहता था जब मुकलावा (दिरागमन) को ससुराल से दूल्‍हा आया तो आधी रात को अकेली घर से पूर्व की ओर निकल गई जिस जगह जोड़ी(छोटी बनी व सूखी तलाई में वह ऊंट कंकाल था) उसमें उन्‍होंने तीन दिन अपने को छिपाए रखा। उसको अब भी लोग जानते हैं और 'करमा बड़ी जोड़' कहकर पुकारते है। यह जगह खण्‍डेले से ऊंगूणी (पूर्व) तरफ 'मुकुन्‍द की बावड़ी के पास है'।
जो मूर्ति बिहारी जी की कर्मेती बाई ने अपने पिता को दी थी वह अब तक खण्‍डेले में बिहारी जी की कहाती है और विराजमान है, इसके पिता ने चिन्‍ह मांगा तथा तब राधाकुण्‍ड में डुबकी लगाकर कर्मेती ने लाकर अपने पिता को दी थी। परन्‍तु प्रिया जी की मूर्ति लाने को फिर डुबकी लगाई और देर हो गई बाहर नहीं निकली तो मूर्ति कुछ छोटी आई, उस पर पिता से कहा कि आपने बड़ी उतावली करके काम बिगाड़ दिया। प्रियाजी की भी उतनी ही बड़ी मूर्ति मिलती यदि कुछ और इन्‍तजार करते और घबराते नहीं यह बात बिहारी जी वालों में प्रसिद्ध है।
   
 

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