वशिष्ठ जी के शक्ति आदि एक सौ पुत्र हुए। पुराणों में कामधेनु द्वारा वशिष्ठ जी की मनोकामना पूर्ण करने का, विश्वामित्र द्वारा कामधेनु को मांगना एवं वशिष्ठ का इनकार करना, विश्वामित्र द्वारा कामधेनु को बलपूर्वक ले जाने का प्रयत्न, कामधेनु द्वारा विश्वामित्र की सेना एवं पुत्रों का विनाश, विश्वामित्र द्वारा शंकर भगवान की आराधना, शिवजी से शक्तिशाली अस्त्र प्राप्त कर वशिष्ठ जी पर पुन: आक्रमण, वशिष्ठ जी पर ब्रह्मास्त्र चलाना, ब्रह्मास्त्र का वशिष्ठ जी पर उनकी तपस्या के फलस्वरूप कोई प्रभाव न होना, विश्वामित्र द्वारा ब्रह्मबल प्राप्त करने हेतु घोर तपस्या करना, वशिष्ठ जी के पुत्र शक्ति एवं राजा सुदास का प्रकरण, राजा सुदास का शक्ति मुनि को कोड़े मारना, शक्ति मुनि का राजा को राक्षस बनने का शाप देना, राक्षस के रूप मे वशिष्ठ जी को धोखे से मारने का मन्तव्य, वशिष्ठ जी को विश्वामित्र के प्रति आदर भावना की जानकारी विश्वामित्र को होना, विश्वामित्र द्वारा वशिष्ठ जी से क्षमायाचना करना आदि प्रकरण विस्तार से पुराणादि में दिग्दर्शित किये गये हैं। अत: विस्तार भय से उनकी पुनरावृत्ति नहीं की जा रही है।
वशिष्ठ को ब्रह्मबल प्राप्त था इसलिए वो ब्रह्मर्षि कहलाये। |