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भूधर जी
भूधर जी, श्रीधर जी के सगे भाई एवं कानड़ जी के सुपुत्र थे। आप उच्‍च कोटि के धर्मात्‍मा एवं परम शिवभक्त थे। आमेर में इतिहास प्रसिद्ध एवं प्रकृति सौंर्दय से परिपूर्ण भूतेश्‍वर जी के रमणीक मंदिर है। इस मंदिर की स्‍थापना भूधर जी द्वारा ही की गई थी और वे नियमित रूप से इसकी सेवा-पूजा करते थे।
भूतेश्‍वर जी का न केवल तान्‍त्रिक स्‍थान है, अपितु एक ऐसा स्‍थान है जहां किसी समय यहो के झरने पर शेर एवं बकरी एक साथ पानी पीते थे।
भूधर जी का राजकाज में भी काफी दखल था। तत्‍कालीन आमेर नरेश आपसे सलाह लेते थे। आपका समय सम्‍वत् 1600 के लगभग का है। (आमेर एवं सांगानेर में सम्‍पन्न शादी के अनुसार, जिसमें आपके भतीजे की शादी हुई थी) आपको आमेराधिपति से जहॉं0संरक्षण प्राप्‍त था वहीं इन्‍हें दुगना पेटिया मिलता था। तत्समय मंदिर में कोई स्‍थाई रूप से रह नहीं सकता था, कहते हैं मंदिर की पैडि़यों पर आदमी सामने से चढ़ता तो अवश्‍य था किन्‍तु, वापिस उतरता नहीं था। पत्रकार आनन्‍द शर्मा के अनुसार महाराजा रामसिंह जी द्वितीय ने इस मंदिर का नवनिर्माण कराया। गिरि सम्‍प्रदाय के एक साधू ने अपनी तान्त्रिक विद्या से, अनिष्टकारी बला को अपने कमण्‍डल में कैद कर लिया, उसके बाद यहां साधु रहने लगे। यहां के आखिरी साधु महात्‍मा शंकरदास जी थे।
बाद में इस मंदिर को जयपुर राज्‍य द्वारा उपाध्‍याय (पारीक) परिवार के श्री रामचन्‍द्र जी को सेवा-पूजा हेतु सम्‍हला दिया गया तथा वर्तमान में उनके वंशज ओमप्रकाश उपाध्‍याय मंदिर की सेवा-पूजा करते हैं। इसी उपाध्‍याय परिवार में श्री श्रीराम जी जयपुर स्थित नाहरगढ़ किले में हाकिम भी रहे है ।
   
 

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