भूतेश्वर जी का न केवल तान्त्रिक स्थान है, अपितु एक ऐसा स्थान है जहां किसी समय यहो के झरने पर शेर एवं बकरी एक साथ पानी पीते थे।
भूधर जी का राजकाज में भी काफी दखल था। तत्कालीन आमेर नरेश आपसे सलाह लेते थे। आपका समय सम्वत् 1600 के लगभग का है। (आमेर एवं सांगानेर में सम्पन्न शादी के अनुसार, जिसमें आपके भतीजे की शादी हुई थी) आपको आमेराधिपति से जहॉं0संरक्षण प्राप्त था वहीं इन्हें दुगना पेटिया मिलता था। तत्समय मंदिर में कोई स्थाई रूप से रह नहीं सकता था, कहते हैं मंदिर की पैडि़यों पर आदमी सामने से चढ़ता तो अवश्य था किन्तु, वापिस उतरता नहीं था। पत्रकार आनन्द शर्मा के अनुसार महाराजा रामसिंह जी द्वितीय ने इस मंदिर का नवनिर्माण कराया। गिरि सम्प्रदाय के एक साधू ने अपनी तान्त्रिक विद्या से, अनिष्टकारी बला को अपने कमण्डल में कैद कर लिया, उसके बाद यहां साधु रहने लगे। यहां के आखिरी साधु महात्मा शंकरदास जी थे।