आपने राजकीय सेवा में रहते हुए छुट्टी का प्रार्थना पत्र दिया लेकिन अवकाश नहीं मिलने पर राज्य से त्यागपत्र देकर घर आ गये व कुछ दिनों बाद ही गृहस्थी त्याग कर जोगी बन गये। आप इतिहास ग्राम के पास ही स्थित मांझवास गांव में तालाब के आगोर में नया बास के पास एक केर की झाड़ी के निकट बैठकर तपस्या में लीन हो गये। आपने कुछ अर्से तक निराहार रहकर गायत्री पुरश्चरण व तपस्या की, इसके पश्चात् गुरू की खोज में आपने भारत भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान ही नवलेश्वर मठ बीकानेर में श्री 1008 योगी विवेकनाथजी महाराज योगेश्वर से गुरू दीक्षा ग्रहण की। वहां से ग्राम मांझवास में आकर आप उसी जगह एक छोटी सी गुफा बनाकर हठयोग व अन्य यौगिक क्रियाओं की कठिन तपस्या में लीन हो गये। योगी गणेशनाथजी महाराज ने एक युग तक धूणां मांझवास में कठिन तपस्या की, व गुरू गोरखनाथजी से साक्षात्कार किया। आपने 5 वर्ष तक भारत तथा नेपाल में योग प्रचार तथा तीर्थ दर्शन किये। विक्रम स. 2023 ईस्वी सन् 1967 को गुरू गोरखनाथजी की मूर्ति ग्राम मांझवास घूनें पर स्थापित की गई। दिनांक 7 जुलाई 1982 भाद्र पद मास में बुधवार के दिन सुबह 7 बजे श्री नरहरिनाथजी राजगुरू पशुपति नाथ मंदिर नेपाल के कर कमलों द्वारा, श्री पशुपति नाथ मन्दिर की नींव रखी। श्री पशुपतिनाथ भगवान का मन्दिर विश्व में प्रथम नेपाल स्थित है तथा दूसरा ग्राम मांझवास जिला नागौर राजस्थान में हैं।