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पुरोहित श्री हरिवंश जी कां‍थड़या
पारीकों में कॉंथडि़ये पुरोहित परम्‍परा से यशस्‍वी एवं नामी रहे हैं। सेढ़ा जी, हर जी, पद्माकर जी, हेमराज जी, पर्वतजी, हरिवंश जी, राघोजी, अभयराम जी, मानजीदासजी, पीताम्‍बर जी, कान्‍हड़ जी आदि बड़े-बड़े नामधारी स्‍थानधारी पुरुषरत्‍न हो गये हैं जिनकी कीर्ति से यह जाति अपना सिर ऊंचा करने में समर्थ है। कांथडि़यों की मनोहर शाहपुरा की ओर एक खांप में अति प्रसिद्ध पुरोहित श्री हरिवंशजी हुए हैं। सेढाजी पुरोहित खींचीबाड़े से राज उदयकरण जी की राणी खींचण जी के साथ डायजे में आये थे। इससे सेढ़ाजी की औलाद के काँथड़े डायजबाल पुरोहित कहलाते हैं और जो वंशज जायल खटोती (मारवाड़) में रहे वे जायलवाल कहाते हैं। काँथडि़यों की ये दो खांपे अति प्रसिद्ध हैं।

सेढ़ाजी की सन्‍तति के पारीक आमेर (जयपुर) के कछाओं के पुरोहित होते हैं। जिस प्रकार कछावे राजपूतों का विस्‍तार होता गया वैसे ही उनके स्‍वामी भक्‍त शुभचिंतक पुरोहित भी बढ़ते गये।

आमेर के महाराज उदयकरण जी क बालोजी और बालोजी के मोकलमीजी हुए फिर उनसे वंश चला सो लेखावत प्रसिद्ध हुए। शेखाजी के वंश में लूणकरण जी और उनके राव मनोहर जी काफी प्रसिद्ध हुए। मनोहरपुर स्‍वयम सम्राट अकबर ने आबाद कराया था। ये मिर्जा मनोहर हफ्तहजारी मनसब के सरदार थे। स्‍वयं हिन्‍दी फारसी के कवि भी थे। इनका क्षेत्र काफी बड़ा था। इनके पास पुरोहित भी वैसे ही ज्ञानी, मानी शूरवीर थे। मनोहरपुर में पारीकों के कॉंथडि़या कुल के पुरोहित सेढ़ाजी की संतानों में (1) हेमराज, (2) गोविन्‍द, (3) बलबण्‍ड इन तीनों थांभों के पुरोहित रहते थे तथा इनके तेज प्रताभ और आश्रय से अन्‍य खांपो के भी पारीक रहते थे। राव मनोहरजी के राव रायचन्‍दजी और राव रायचन्‍दजी तिलोकचन्‍द जी हुये थे। इनकी वंशावली की कुछ स्‍मृति नीचे लिखे छप्‍पय से होती है।

उदयकरण महराव ताहि सुत बालो जान हु।
मोकल, सेखावत, रायमल, सूरज मानहू।।


लूणकरण तिहिं नन्‍द ताहि सुत भये मनोहर।
रायचन्‍द,‍ तिलोकचन्‍द आनन्‍द अमर धर।।


नृप जगतसिंह सकतेस सुत जसवन्‍त जाहर नाथ भुव।
दीपत दिनेस विसनेस घर महाराय हनुवन्‍त हुव"।।

 
 

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