पारीकों में कॉंथडि़ये पुरोहित परम्परा से यशस्वी एवं नामी रहे हैं। सेढ़ा जी, हर जी, पद्माकर जी, हेमराज जी, पर्वतजी, हरिवंश जी, राघोजी, अभयराम जी, मानजीदासजी, पीताम्बर जी, कान्हड़ जी आदि बड़े-बड़े नामधारी स्थानधारी पुरुषरत्न हो गये हैं जिनकी कीर्ति से यह जाति अपना सिर ऊंचा करने में समर्थ है। कांथडि़यों की मनोहर शाहपुरा की ओर एक खांप में अति प्रसिद्ध पुरोहित श्री हरिवंशजी हुए हैं। सेढाजी पुरोहित खींचीबाड़े से राज उदयकरण जी की राणी खींचण जी के साथ डायजे में आये थे। इससे सेढ़ाजी की औलाद के काँथड़े डायजबाल पुरोहित कहलाते हैं और जो वंशज जायल खटोती (मारवाड़) में रहे वे जायलवाल कहाते हैं। काँथडि़यों की ये दो खांपे अति प्रसिद्ध हैं।
सेढ़ाजी की सन्तति के पारीक आमेर (जयपुर) के कछाओं के पुरोहित होते हैं। जिस प्रकार कछावे राजपूतों का विस्तार होता गया वैसे ही उनके स्वामी भक्त शुभचिंतक पुरोहित भी बढ़ते गये।