किशोर जी पर्वतजी के पुत्र खेमूजी क लड़के थे। अपने पितामह की भांति आप भी उच्चकोटि के भक्त हुए हैं तथा अपना अधिकांश समय वे भक्ति भावना में ही व्यतीत करते थे। तीर्थाटन एवं तीर्थयात्रा आपका मानों जीवन क्रम ही था। आपने सांभर के पास देवयानी तीर्थ स्थल पर रघुनाथ जी के मंदिर का निर्माण कराया जो उनकी भक्ति भावना का परिचालक है।