पीवरी से शुकदेव जी के 12 महान तपस्वी पुत्र हुए जिनके नाम भूरिश्रवा, प्रभु, शम्भु, कृष्ण और गौर, श्वेत कृष्ण, अरुण और श्याम, नील, धूम वादरि एवं उपमन्यु थे। जिनके गुरुकृत नाम क्रमश: भारद्वाज, पराशर(द्वितीय), कश्यप, कौशिक, गर्ग, गौतम, मुदगल, शाण्डिल्य, कौत्स, भार्गव, वत्स एवं धौम्य हुए और कीर्तिमती नामक एक योगिनी पतिधर्म पालन करने वाली कन्या। कीर्तिमती का विवाह भारद्वाज वंशज काम्पिल्य नगर के राजा अणुह से हुआ। महान योगी ब्रह्मदत्त जी को कीर्तिमती ने जन्म दिया। हरिवंश पुरण में शुकदेव जी का वंश विस्तार बताया गया है। शुकदेव जी के संतान होने के सम्बंध में भ्रांति है। |