वेदव्यासजी ने जहां पुराणादि साहित्य की रचना की वहीं महाभारत जैसे महान ग्रंथ के भी वे रचनाकार हैं। मानव मात्र के लिए अध्ययन की सुविधा के लिए, जिससे मनुष्य अल्पायु में भी वेदादि के एक अंश या भाग का अध्ययन कर सके, व्यास जी ने ऋग्वेद के 21, यजुर्वेद के 101, सामवेद के 1000 एवं अथर्ववेद को 9 भागों में विभक्त किया जो कुल 1131 हैं तथा वेद की शाखाओं के अध्ययन का नियम निर्धारित किया जिससे कि प्रत्येक व्यक्ति वेद की कम से कम एक शाखा का तो अवश्य ही अध्ययन कर सके। |