अपने पीहर खींचीवाड़ा जाने पर महारानी साहब ने अपने पिताजी से उलाहने के रूप में कहा कि आपने मुझे सभी कुछ दिया और जयपुर में भी किसी प्रकार की कमी नहीं है किन्तु जैसा कि आप जानते हैं, मैं नित्य ब्राह्मणों के दर्शन किया करती हूं, यदि यहां का कोई ब्राह्ममण मेरे साथ जाता तो मेरे लिए नित्य नियम में किसी प्रकार की बाधा नहीं आती और मैं नित्य ही ब्राह्मण के दर्शन करती। जब रानी साहिबा खींचीवाड़ा से आमेर जाने लगी तो खींचीवाड़ा नरेश ने पं. राज श्री सेढ़ाजी को, जो कि उच्च श्रेणी के विद्वान, कुशल नीतिज्ञ एवं धर्म परायण व्यक्ति थे-अपनी कन्या के साथ भेज दिया। सेढाजी का आमेर आने पर उचित राज्योचित सम्मान किया गया तथा सेढाजी रानीसाहिबा के पुरोहित हुए। श्री सेढाजी पारीक कांथडि़या पुरोहित थे।