मंगल पांडे की पत्नि भी अपने पुत्र 'कीर्ति' को लेकर मेवाड़(राजस्थान) पहुंची। किन्तु वहां भी अपने को असुरक्षित समझ कर जयपुर चली गई, जहां कि तत्कालीन महाराजा माधोसिंह जी के एक प्रमुख आमात्य रामप्रताप पुरोहित ने उनके रहने एवं कीर्ति की पढ़ाई का पूरा-पूरा प्रबंध किया। 17 अप्रैल, 1890 को अमर शहीर पांडे की धर्म पत्नि भी अपने पुत्र तथा अपने दो पोतों को छोड़कर स्वर्ग सिधार गई। |