इस लेख से स्पष्ट है कि मांडलगढ़ (बूंदी) के हाडा नृपति की राजकुमारी मेवाड़ राजवंश के महाराणा विक्रमादित्य के पाणिग्रहण संस्कार में पौरोहित्य कर्म संपन्न कराने वाला जानाशंकर हाडाओं (चौहानों) का राजपुरोहित था। जन श्रुतियों के आधार पर वह विद्वान भी था। उसके पूर्वजों की परम्परा भी उसी के अनुरूप रही होगी। बूंदी के हाडाओं का पौरोहित्य पारीक पुरोहितों को प्राप्त था। इसी प्रकार खींची चौहानों का पौरोहित्य भी कांथडि़या पुरोहित करते थे। बूंदी और मांडलगढ़ के हाड़ा चौहान अजमेर के चौहानों की परम्परा में, जिसमें वीसलदेव, सोमेश्वर, पृथ्वीराज जैसे सम्राटों ने जन्म लिया था। अत: संभव है, चौहानों के पौरोहित्य कर्म का यह अधिकार परम्परा से ही पारीकों के इस कुल को प्राप्त राह हो। |