खारीयां कलां गांव नागौर मेड़ता रोड़ पर दो कि.मी. भीतर कुचेरा के पास है। करीब 450 वर्ष पहले गांव इन्दरोंका नारवा, जो जोधपुर जिले में है, से रामानंदजी महाराज जो कान्थडि़या पुरोहित थे इस गांव में आये यहां आकर आपने तपस्या की थी। कुछ लोगों का मत है कि आप पुराने गांगाणी गांव जो जोधपुर जिले में है से उठकर इन्दरोका आये थे वहां से खारियां कलां आये। आपने आजीवन तपस्या ही की थी। आपकी तपस्या के प्रताप से ही आस पास के गांव में आप की पूजा की जाती है। इसी गांव में आपने जीवित समाधि ली थी। समाधि स्थल पर मूर्ति की जगह पगलियों की पुजा की जाती हैं। पिछले वर्षो में समाधि स्थल पर विशाल मन्दिर तथा बाउन्डरी बना दी गई हैं। दोनो समय मन्दिर में आरती होती हैं गांव में परणी फेरी की जात दी जाती है तथा झडूला उतारा जाता है, इस गांव में पारीक समाज का कोई घर नहीं है। पूरा गांव आपका अनन्य भक्त है। |