बिमलानंद प्रबोध वंश, ''संतदास'' सींवा धरम।।
गोपीनाथ पद राग, भोग छप्पन भुंजाये।
पृथु पद्धति अनुसार देव दंपति दुलराये।।
भगवत भक्त समान, ठौर द्वै कौ बल गायौ ।
कवित सूर सों मिलत भेद कछु जात न पायौ।।
जन्म, कर्म, लीला, जुगति, रहसि, भक्ति भेदी मरम।
बिमलानंद, प्रबोध बंस, ''संतदास'' सींवा धरम।। ।।125।। (89) |