ब्रह्मर्षि वशिष्ठ का विवाह कर्दम ऋषि की पुत्री अरुन्धति से हुआ था। उनके शक्ति, आदि सौ पुत्र हुए। महामुनि शक्ति बाल्यकाल से ही तीक्ष्ण बुद्धि के धनी थे। अपने गुरु एवं अन्य बुजुर्गों की आज्ञा पालन मानों उनके जीवन जीवन का दर्शन था। अपनी बात जहां तर्क संगत रूप में कहकर वे दूसरे को प्रभावित करने की क्षमता रखते थे वहीं मधुर वक्ता भी थे, जिससे अनायास ही लोग उनकी ओर आकर्षित हो जाते थे। शक्ति मुनि ने अपने पिता श्री से ही उनके आश्रम में रहकर वेदाध्ययन किया। उनकी विलक्षण प्रतिभा, तपस्या एवं स्वाध्याय के कारण सभी उनका समुचित आदर करते थे। अपने स्वभाव के कारण वे सर्वप्रिय थे।