खौह के पश्चात इस घराने ने फतेहपुर को अपना निवास स्थान बनाया। यह कायमखानी नवाबों का समय था। नवाब इन से कर्ज लेकर अपनी आवश्यकता की पूर्ति करते थे। फतेहपुर में भी इनके उस समय के मकान दुकानादि विद्यमान हैं।
संवत् 1733 में इस घराने के पोकररामजी एवं मोहनराम जी ने तत्सामयिक अम्बर/आमेर नरेश महाराजाधिराज सवाई जयसिंह जी देव की आज्ञा से उत्साहित होकर सांगानेर का निवास स्वीकार किया। महाराजाधिराज की ओर से उन्हें व्यापार करने के लिए आधी जगात माफ करने की सुविधा दी गई थी। सांगानेर में दुकानों के अतिरिक्त हवेली मन्दिर और बाग उनके पुराने वैभव का परिचय दे रहे हैं।