राव शिवसिंह के समय से ही इस घराने को सीकर में स्थायी रूप से आबाद होने का सुयोग प्राप्त हुआ है। सीकर में प्रासादोपम हवेली और दुकाने पुरोहित घराने के स्वरूपानुरूप ही बनी हुई हैं। सीकर की ओर से प्रारम्भ में ही कासाखर्च भोजन व्यय नियत होकर उनके लिये निज की व्यवहारोपयोगी वस्तुओं पर पूरी तथा व्यवहार के लिए आधी जगात(कस्टम ड्यूटी) मुआफ की गई थी। इसके अतिरिक्त भी सब तरह की सुविधाएं उन्हें दी गई थी। राव शिवसिंह जी के परवर्ती राव समर्थसिंहजी, नाहरसिंहजी, चादसिंहजी, बुधसिंहजी, देवीसिंहजी और रावराजा लक्ष्मणसिंह जी प्रभूति ने भी यथा समय आराजी और कोठियां चाही उदक सीगे उत्सर्ग करी जिन का उपभोग यह घराना करता आ रहा है।