इनसे (गंगारामजी) दीक्षा लेकर, जग के सुख कारक सुखराम हुए।
जिनके उपदेशों से बहुधा, जन के पूरण काम हुए।।
गांव गांव इननें अपने मत का खूब प्रचार किया।
अज्ञानी जनता को दे दे ज्ञान-दान उद्धार किया।।
दिवा निशा में दादू राम के, नाम जाप में रहे निमग्न।
जो भी शरण आ पड़ा उसका, किया तुरत इनने दुख भग्न।। |