वराह जी पुरोहित द्वारा आयोजित उक्त सम्मेलन में उपस्थित सभी महानुभावों ने यह निर्णय किया कि ''गोत्र, शाखा, प्रवर आदि की नियमित गणना रखी जावे। हमारी जाति में अन्य नकली ब्राह्मणों का प्रवेश न हो तथा जाति में कितनी न्यूनता व अधिकता हुई इसकी संख्या रखने के लिए अपनी अपनी जाति से एक एक व्यक्ति चुना जाये और उसके निर्वाह के लिए जातीय उत्सवों (विवाहादि) में पारितोषिक दिया जाये। ऐसा व्यक्ति अपनी जाति के गोत्र, शाखा, प्रवर आस्पद तथा जाति की बढ़ोतरी घटोतरी का पूरा विवरण लिखा करे।'' |