Pareek Vansh Parichay
 
 

 
Home > Pareek Vansh Parichay > History > Brahman Parichay
    
भिन्‍न-भिन्‍न उपाधियों के कारण उच्‍च पदासीन राजनेताओं व अन्‍य प्रमुख हस्तियों को जो ब्राह्मण हैं, हम आज तक जान नहीं पाए हैं। इनमें से कुछ के नाम इस प्रकार हैं- श्री राजगोपालाचार्य, डॉ. राधाकृष्‍णन, गोपाल स्‍वरूप पाठक, बी. डी. जती, वी.वी. गिरी, आर वेंकटरमन, डॉ. शंकरदयाल शर्मा, जी.वी. मावलंकर, अनतशयनय अयंगार, शिवराज पाटिल, टी.एन. शेषन, रंगनाथन मिश्र, श्री लालनारायण सिंह, भूलाभाई देसाई, श्री पी.वी. नरसिंहराव, विधानचन्‍द्र राय, श्री डी.ए. देसाई, जय ललिता, एन.वी. खरे, नृपेन्‍द्र चक्रवर्ती, प्रफुल्‍ल कुमार महन्‍तो, ई.एस. नम्‍बूदरीपाद, कैप्‍टन रमेशचन्‍द्र बक्‍सी, लेफ्टिनेंट कर्नल हरिवंशसिंह महतो, श्री भुपेन्‍द्र कुमार वैद्य, श्री कृष्‍ण चन्‍द्र भट्ट, माधवराव पेशवा, सेनापति वापट, श्री टी.सी. रैना, प्रदीप कुमार त्‍यागी, विजयलक्ष्‍मी पंडित, सुष्मिता सेन, ऐश्‍वर्या राय, गुरूदत्त, सत्‍यजीत राय, किशोर कुमार, ऋषिकेश मुखर्जी, अनुपम खेर, अशोक कुमार गांगुली, उत्‍पल दत्त, मनमोहन देसाई, महेश भट्ट, आनन्‍द बक्‍सी, वीर शिरोमणि मंगल पांडे, वीर बहादुर तात्‍याटोपे, वीरांगना लक्ष्‍मी बाई, महान क्रांतिकारी पं. रामप्रसाद बिस्मिल्‍ल, चन्‍द्रशेखर आजाद, स्‍वातत्र्य वीर सावरकर, कल्‍पना दत्त, सुहासिनी गांगुली, शोभा रानीदत्त, अरूणा आसफ अली, किरण चक्रवर्ती, महादेव गोविन्‍द रानाडे, सुरेंद्र नाथ बेनर्जी, लोकमान्‍य बाल गंगाधर तिलक, महामना पं. मदन मोहन मालवीय, गोपाल कृष्‍ण गोखले, चक्रवर्ती राजगोपालाचार्य, सुब्रमण्‍यम भारती, के.एम. मुंशी, विनोबा भावे, श्री राम शर्मा, गुरूदेव रवीन्‍द्र नाथ ठाकुर, श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी, डॉ. केशवराय बलिराय हेडगेवार, माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर, पं. दीनदयाल उपाध्‍याय, मेजर सोमनाथ शर्मा, पू. थल सेनाध्‍यक्ष श्री जे.एन. चौधरी, मेजर आशाराम त्‍यागी, मेजर नीरोद वरूण बैनर्जी, वीर जयदत्त जोशी, अन्‍तरिक्ष यात्री राकेश शर्मा तथा महापंडित राहुल सांकृत्‍यायन ये सबके सब ब्राह्मण हैं, थे व रहेंगे, लेकिन समय के प्रभाव से उपाधियां अलग-अलग लग गई। 

जब सारा विश्‍व अज्ञान के कोहरे से आच्‍छादित  था तब लोग पहाड़ों में भेड़-बकरियां  चराते फिरते थे। वो घास-फूस  की झोपडि़यों व पर्वत  की गुफाओं में रहते थे।  पशुओं का कच्‍चा मांस खाते थे। उनकी खाल व वृक्षों  की छाल को पहनते थे। जब न संस्‍कृति थी न सभ्‍यता  थी न गिनती का ज्ञान था।  प्राकृतिक आपदाओं का प्रतिकार था और न ही बीमारियों का कोई उपचार था तब वृहतर  भारत में सुदूर अतीत में  विभिन्‍न स्‍थानों पर ब्रह्मर्षियों  ने वेद का साक्षात्‍कार किया था। वेद का अर्थ है ज्ञान, ज्ञान ईश्‍वर प्रदत्त है अत: वेद को अपौरूषेय कहा गया है। इतने बड़े वैदिक साहित्‍य की सरंचना तथा उसका अक्षुण परिक्षण करना कोई सहज कार्य नहीं है। विश्‍व के किसी भी समाज का आज तक इतना बड़ा योगदान न किसी ने देखा है और न ही किसी ने सुना है। विश्‍व ब्राह्मण समाज का सदा ऋणी एवं कृतज्ञ रहेगा। जब मानस पुत्रों की कोई संतान न होने से सृष्टि वृद्धि नहीं हुई तो फिर ब्रह्माजी ने अपने समान गुणों वाले सात मानस पुत्र पैदा किए। मरीचि, अत्रि, अंगिरा, पुलस्‍त्‍य, पुलह, क्रतु एवं वशिष्‍ठ। सर्वप्रथम ये सात ब्राह्मण हुए। जिनमें पुलस्‍त्‍य की संतान राक्षस हो गई। तब छ: ब्राह्मण सर्वप्रथम हुए अतएव इन्‍हीं की वंश परम्‍परा चलकर छ:न्‍याति ब्राह्मण हुए। ब्राह्मणों के प्रथमोत्‍पति थान को मनु ने ब्रह्मावर्त नाम के देश से वर्णन किया है। ब्राह्मणें की उत्‍पत्ति बार-बार जिस देश में होती है उस देश को ब्रह्मावर्त कहते हैं। सम्‍वत् 1643 में महाराजा सवाई जयसिंह के अश्‍व मेघ यज्ञ में सर्व ब्राह्मणों की सम्‍मति से 'छ:न्‍याति संघ' की स्‍थापना की गई। जिसमें पारीक ब्राह्मणों को प्रथम स्‍थान पर रखा गया। सम्‍मेलन के निर्णय के अनुसार छ:न्‍याति संघ में भोजन व्‍यवहार एक और कन्‍या संबंध निज-निज वर्ग में निश्चित हुआ। छ:न्‍याति समुदाय में पारीक, सारस्‍वत दाहिमा, गौड़, गुर्जर गौड़, और सिखवाल एक भोजन में सम्मिलित हो गए। इनके पीछे खण्‍डेलवाल ब्राह्मण भी जब छ:न्‍याति में मिलने को तैयार हुए तो उनको कहीं तो स्‍वीकार किया कहीं नहीं किया। 

राज प्रबंध चलाने  हेतु अथवा प्रजा को न्‍याय दिलाने हेतु वेदों को आधार मानकर पुरोहित वर्ग ब्राह्मण के माध्‍यम से वैधानिक  व्‍यवस्‍थाएं लेते थे। ब्राह्मण राजा को प्रजा के बारे में  उसके कर्तव्‍यों के प्रति  सचेत रखता था। प्रजा के कर्तव्‍य भी ब्राह्मण द्वारा निश्चित किए जाते थे।  ब्राह्मणों के कठोर अनुशासन  राजाओं को सहने पड़ते थे।  इतिहास के पन्‍ने उलटने पर जानकारी मिलेगी कि ब्राह्मण के कठोर अनुशासन के नीचे दबकर रहना क्षत्रिय के लिए असहनीय हो उठा। चन्‍द्रगुप्‍त ने गुरू चाणक्‍य का वृषल संबोधन तो सहन कर लिया, किन्‍तु आगे चलकर अशोक ने बुद्ध धर्म को अपना लिया। ब्राह्मणों के यज्ञों पर पाबंदी लगा दी। ब्राह्मण समुदाय इस अपमान का सहन नहीं कर सका और उसने क्षत्रियों से सत्ता छीननी आरंभ कर दी। परिणाम स्‍वरूप ब्राह्मणों ने देश पर कई वर्षों तक राज किया। इनमें निम्‍नलिखित वंश राजवंश प्रसिद्ध हुए: 1. शुक 2. गृत्‍समद 3. शोनक 4. पुलिक 5. प्रद्यौत 6. पालक 7. विशाखपुप 8. अजय 9. नन्‍दीवर्धन। ईस्‍वी पूर्व 26 से 72 वर्ष के बीच वासुदेव भूमिमित्र नारायण तथा सुदर्शन नामक ब्राह्मण राजाओं ने राज किया। ईसा से 27 वर्ष पहले मेघस्‍वाती नामक राजा ने कणवायन ब्राह्मणों से ही मगध का राज लिया था। 250 ई. पूर्व बाकाटक नाम के एक ब्राह्मण का राज्‍य था। ईसा से 184 वर्ष पहले शुंग वंश में कुल 10 राजा हुए जिन्‍होने 112 वर्ष राज किया था। ये सभी ब्राह्मण थे। ईस्‍वी सन् 769 के असापास चच और चन्‍द्र ये दोनों ही राजा ब्राह्मण थे जिन्‍हें अरब विजेता मुहम्‍मद इब्‍न कासिम ने पराजित किया था। ईस्‍वी सन् 977 के पहले जयपाल का राज्‍य था जो ब्राह्मण था।
    
 

Designed By: Manoj Pareek & Vikash Pareek (ARK Web Solution) Copyright ® 2010. PareekPariwar.org  
Home | Pareek Vansh Parichay | Vyaktigat Parichay | Events | Feedback | Contact Us | Privacy Policy | Sitemap