शुकदेवजी ने अपने 12 पुत्रों को विद्या पढ़ने के लिए भेज दिया था। उन 12 पुत्रों के नाम भूरश्रवा(भारद्वाज), प्रभु (पराशर), शंभु (कश्यप), कृष्ण (कौशिक), गौर (गर्ग), श्वेतकृष्ण(गौतम), अरुण(मुद्गल), गौरश्याम(शान्डिल्य), नील (कोत्स), धुम्र(भार्गव), बादरि(वत्स), उपमन्यु(धोम्य) इनमें से 12 नाम गुरुजी द्वारा दिए गए हैं। एक अन्य पुस्तक में लिखा है कि शुकदेव जी के कीर्तिमति नाम कन्या तथा पांच पुत्र हुए जिनके नाम भूरिश्रवा:, प्रभु:, शम्भु:, कृष्ण: तथा गौर: हैं। कीर्तिमति को शुक वंश में प्रसिद्ध होने के कारण ब्रह्मदत्त जी भी पराशर के पक्ष में गये। |