पारीक समाज के आदि पुरुष, वंश प्रवर्तक भगवान पराशर हैं। सतयुगीन आश्विन शुक्ल पूर्णिमा अर्थात शरदपूर्णिमा को भगवान पराशर का अविर्भाव हुआ। इनके पिता का नाम महर्षि शक्ति तथा माता का नाम देवी अदृश्यन्ती था। आचार्य सायण माधव ने अपने प्रसिद्ध माघवीय धातुवृति के क्रयादिगण के 16वें सूत्र में बताया है "पराश्रणाति पापातीति पराशर:" अर्थात जो दर्शन स्मरण करने मात्र से ही समस्त पाप-ताप को छिन्न-भिन्न कर देते हैं वे ही पराशर हैं। इस प्रकार पराशर नाम का स्मरण करने मात्र से ही व्यक्ति पवित्र हो जाता है। कितना पवित्र नाम है 'पराशर'। इतनी ही पवित्र है, भगवान पराशर प्रणीत "पाराशर गीता" जिसके नियमित पठन-पाठन तथा स्मरण से जीव मुक्ति मार्ग की ओर अग्रसर हो सकता है। पाराशर गीता महाभारत शान्तिपर्व के मोक्षधर्म में उल्लेखित है इसमें कुल नौ अध्याय हैं। भगवान पराशर द्वारा राजर्षि जनक को दिया गया धर्मोपदेश अत्यंत सुन्दर ढंग से इस गीता में व्याख्याईत है। |