# सिद्धांत तात्विक हो, व्यवहारिक हो और कौटुम्बिक जीवन में चरितार्थ हो।
# सत्य सिद्धांतों को पूरा करने के लिए व्रत लिये जावें। इसके लिए बुद्धि, चित्त, शरीर शक्ति को मजबूत करें।
# बुद्धि, वित्त, शरीर शक्ति – ये तीनों मिलकर एक उद्देश्य में लगें, अलग-अलग दिशा में न जावें।
# जीवन पुष्टिमय हो। वसुंधरा पर स्वर्ग लाने के लिेए जीवन को निरंतर पुष्ट बनाने की आवश्यकत है।
# क्षत्रियों में शूरता व प्रतिकार क्षमता हो। यानि आज के संदर्भ में सेना में व जनता में इन गुणों का विकास होना चाहिए, जिससे कोई भी दुष्ट आंख उठाकर न देख् सके।
# प्रभावी नेतृत्व होना चाहिए।
# ज्ञानी, शक्तिशाली और वैभवशाली पुरुषों को मिलकर समाज को सब प्रकार से शक्तिशाली बनाना चाहिए, समाज में ज्ञान हो, शक्ति और वैभव हो।
# परमात्मा के प्रति प्रीति, भीति और आत्मीयता बढ़ाएं। |