'पारीक्ष संहिता' नामक ग्रन्थ में पारीक्ष शब्द की निम्न व्युत्पत्ति बताई गई है-
पारीक्ष- परीक्षायस्यातीति परीक्षा शब्दात् (अणच् 5 / 2 / 103) इत्याणि आदि पदवृद्धौ (यस्यति च. 6 / 4/ 148) इत्याकार लोपे पारीक्ष शब्दोनिष्पन्न:। तेन च परीक्षा करणयोग्यतावत्यं ज्ञायते। एवं परीक्षित शब्दार्थ इत्थं ज्ञेय:: परीक्षित: परीक्षां इति प्राप्त: परीक्षित: तत: परीक्षित एव पारीक्षित: (स्वार्थे अण्)।
आचार्य चरक द्वारा सुप्रसिद्ध ग्रन्थ 'चरक संहिता' में लगभग अढाई हजार वर्ष पूर्व पारीक्ष जाति का वर्णन आया है, मुद्रल के वचनानुसार जो (ब्राह्मण) लोक-परलोक के तत्व-चिन्तन के मार्ग में स्वयं की परीक्षा में अग्रणी रहते हैं, उन्हें पारीक्ष कहा गया है।