अर्थात कर्म, ज्ञान और उपासना काण्ड युक्त वेद तथा व्याकरण, निरूक्त, छन्द, कल्प, शिक्षा और ज्योतिष- इन वेदांगों को जो ब्राह्मण भली-भांति पढ़-लिखकर उनके सिद्धांतों को अपने विचार द्वारा निर्णय करके जनता को समझा सके, उसे पारीक्ष ब्राह्मण कहते हैं।
इस प्रकार "पारीक्ष" शब्द से पारीक शब्द की व्यूत्पत्ति अधिक व्यावहारिक, विश्वसनीय एवं समीचीन ज्ञात होती है। |