उस समय पूरे भारत में पारीकों के घरों की संख्या 1,99,050 थी।जो ब्राह्मण वेद और वेदागों का व्याख्यानो द्वारा विवेचन करके संसार में विस्तार करने लगे उनका आस्पद (उपाधि) ऐसा हुआ। जो ब्राह्मण वेद के एक देश (मंत्र अथवा ब्राह्मण भाग) को अपनी जीविका के लिए द्विजातियों को पढ़ाता है उस ब्राह्मण का नाम उपाध्याय होता है। जो ब्राह्मण वेद-वेदांग का पूर्ण विद्वान होकर पुरोहिताई करने लगे, उनको पुरोहित कहने लगे। पारीक ब्राह्मणों में जिन ब्राह्मणों ने वेद की तीनों संहिताओं का पठन पाठन अच्छी तरह से किया उनका नाम त्रिपाठी (तिवाड़ी) हो गया। जो ब्राह्मण अपने धर्म का पूर्ण रीती से पालन करते हुए विष्णु भक्त होकर वेदों की संहिताओं का पठन पाठन करते थे उनका नाम द्विवेदी हो गया। जो ब्राह्मण सांग (होरा, संहिता, गणित अंक सहित) ज्योतिष शास्त्र को अच्छी तरह जानकर संसार की सामाजिक सेवा करते थे उनका नाम ज्योतिषी (जोषी) हो गया। पारीकों में जो ब्राह्मण कर्मकाण्ड पारायण होकर वैदिक धर्म कर्म का प्रचार करते हुए वेद और शास्त्रों की रक्षा पठन पाठन से करने लगे उनका नाम पाण्डेय (पाण्डे) पाण्डिया हो गया। जो ब्राह्मण अनेक कर्म (पंडिताई, व्यापार, खेती, लेन-देन आदि) करने लगे। |